दद्दा हमार शादी अब कैसन होय ?

>> 22 April 2010



उधर हमार दद्दा कहत रहे कि "पढ़ लै ससुर, ब्याह-व्याह तब भी हो जाएगा ।" हम खूब मन लगाय के पढ़त रहे । इतना पढ़े कि .... कितना पढ़े ? पूरे 25 बरस तक पढ़त रहे ....ऊ कैसे ?
अरे शुरू मा हमार कच्छा बदलने के दिन रहे और पाँच बरस यूँ ही गुजर गये...ऊ का बाद नर्सरी फिर के.जी....तब जाके कक्षा 1 में पहुँचे ....तबसे जोड़ लो

कच्छा बदलने के दिन = 5 साल
नर्सरी + के.जी. = 2 साल
1 से 12 वीं तक = 12 साल
स्नातक = 4 साल
स्नातकोत्तर = 2 साल
--------------------
कुल = 25 बरस

तब जाके साँस में साँस आयी कि चलो दद्दा की बात मान लिये अब ब्याह-व्याह में कोनो दिक्कत ना आवेगी । पर ससुर हम का देखत हैं का...बखत बदल गया है...ऊ भी बड़ा तेज़ी से....

अब लड़की कहत है कि हमका चाहिए ....Tall, Dark and Handsome !
अब हमारे लिये तो कर दी ना मुसीबत खड़ी ....अब हम Tall तो कतई नहीं हैं ....ये मुएँ ऋतिक टाइप लड़कों ने हम जैसों का जीना हराम कर दिया है Tall होके .....तो भैया Tall तो हम से हुआ ना जाएगा ....

कहती हैं Dark.... अरे बचपन मा अम्मा कहत रही साबुन मल मल के नहाया कर ...देख तो रंग कितना काला पड़ गया है ...और आजकल ई सब कहत हैं कि...उनका Dark चाही...अजीब मुसीबत में फसाय दिये .....और Dark तो Dark ....कितना Dark चाही ...क्लेरिफाई करना चाहिए ना .....

अब Handsome तो कसम से हम कभी रहे नहीं .....हाँ सुने रहे कि Fare & Handsome करके कोई क्रीम आय रहे ....सुना है फिर लड़की लोग कहत हैं खूब Hi Handsome....Hi Handsome....

सोचत हैं कि Handsome तो चलो ई क्रीम हमका बनाय दिये...फिर हम सुनत रहे कि लड़की लोगन को ना जाने का का और चाही.....

कहत रही ....
He should be caring, responsible, fun loving, cool, smart, intelligent, sexy, honest, sensible, cute.... Rich.... good looking.....and love me a lot.....

and one thing He should except me as I am.....

और भी ना जाने का का कहत रही .....अरे हम तो कहत हैं अरे दद्दा खामखाँ हमसे 25 बरस परेड करवा ली तुमने...अब पड़ गये ना लेने के देने.....तुम्हारे कहने पर हम तो पढ़त रहे...अब देखो दद्दा माहौल कितना बदल गवा है...इससे तो अच्छा था कि हम बचपन से ही Fare एंड Handsome क्रीम लगाते रहते और अपना पुस्तैनी 100 बीघा खेत की देखभाल करते ...और पड़ोस के राम भरोसे चाचा के छोरे की तरह पैसा देकर किसी और से परीक्षा दिलवाई के पढ़े लिखे कहलाते...कम स कम ई नौबत तो ना आती दद्दा .....

फिर हम भी होते कम से कम Dark, Handsome और का कहत हैं Rich और Sensible...और Cute जैसे कुछ

37 comments:

Shekhar Kumawat 22 April 2010 at 18:41  

acha maths lagaya aap ne shadi ka

bahut khub

shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

kshama 22 April 2010 at 18:51  

Bahut maza aaya padhne me!

Shivi 22 April 2010 at 22:17  

ha ha how true! :D

वन्दना 22 April 2010 at 22:20  

हाय! बडे बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले…………………सुन्दर अभिव्यक्ति।

Priya 22 April 2010 at 22:23  

ha ha ha.....kya anil aap bhi...kabhi exercise ki hai lagta hain :-)

प्रवीण पाण्डेय 22 April 2010 at 22:56  

अच्छा है विवाह हो चुका है नहीं तो आपका लेख दिल डुबो दिये था ।

Sonal Rastogi 22 April 2010 at 23:00  

मज़ा आ गया ,ऐसी ही रचनाओं की तलाश में तो ब्लॉगजगत में आये थे, आभार

Tarkeshwar Giri 23 April 2010 at 07:35  

bachawa tanik bachye ke raha karo. kanhi tohar malikiniya padh li to mushibat hoi jayegi.

ajit gupta 23 April 2010 at 09:19  

अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे। अभी तक तो कन्‍याओं के गुण ही गिनाए जाते थे अब वर के भी। हा हा हा हा।

मिहिरभोज 23 April 2010 at 12:35  

कहो तो रिस्ता भिजवाय दें....हमार दूध वाले की छुकरिया .....घर बैठी है...बस इक ठो छोटा मुन्ना है....ऊ की चिंता तुमको न करनी चाही...उ छुकरिया का नाना संभाल ले......

अनिल कान्त : 23 April 2010 at 13:24  

@ मिहिरभोज
फिर हमार दद्दा को कौन संभालिये ?
:)

Shyam 23 April 2010 at 13:31  

sahi kah rahe ho sala padai se kabhi sadi nahi hoti hai

laveena 23 April 2010 at 14:58  

ha ha ha ha ...ye kaisi dard bhari daastan likh di ki tumhare dukh par sab hans rahe hain..?? bt naya roop dekha tumhari rachna ka...vry nice keep it up..

यशवन्त मेहता "फ़कीरा" 23 April 2010 at 15:42  

kahe bhaiya !!!!

ab ham to nahi hans sakat hei

na hi ro sakat hei........

बेचैन आत्मा 23 April 2010 at 20:20  

२५ बरस के बाद ५ बरस नौकरी खोजन में लग गए ऊ का..!
पहिले कऽ जमाना ठीक रहा पढ़त-पढ़त कब शादी हुई गई, कब बच्चे..! ४० बरस होत-होत अपने बन गए दद्दू..!
अब तऽ भैया शादी होत-होत पेट हो जात है कद्दू..!
कैसन सुंदर! कैसन हैंडसम!

sangeeta swarup 23 April 2010 at 22:20  

वाह...गणित बड़ा ज़बरदस्त है...

अपूर्व 24 April 2010 at 11:45  

मान गये आपके गणित को जनाब...ऐसी टर्म्स-एंड-कंडीशन्स पहले भी पढ़ कर लगता था कि कुछ मजेदार लिखा जा सकता है..मगर आपने कमाल कर दिये..अब हमे पता होता इतना तो बचपन से ही वही वाली क्रीम सुबह-शाम घोटते और बन जाते डार्क अउर हेंडसम..मगर बख्त गुजर गया अब तो..मगर उम्मीद है आपको पढ कर और लाभार्थियों क ज्ञानचक्षु खुलें जिनको देर नही हुई है अभी!!
मज़ा आया भई..वन्स मोर!

हरकीरत ' हीर' 24 April 2010 at 16:30  

फिर हम भी होते कम से कम Dark, Handsome और का कहत हैं Rich और Sensible...और Cute जैसे कुछ

वाह..वाह....बहुत खूब ....आप अब भी हैंडसम हैं ....!!

Rahul Rishi 24 April 2010 at 20:48  

Love this post, and really love reading something in Hindi after ages.

@nkur 24 April 2010 at 22:46  

lovely post. Amazing sense of humor :)

Rajlakshmi 25 April 2010 at 02:42  

hahahahaha :D ohh god freaking hillarious :D
maaza aa gaya bhaiya parhke :D

amit 25 April 2010 at 13:05  

Bahut badiya Anil Bhai..
Hamesha ki Tarah is mai bhi apni lekhani ki jhalak dikhla Di..
Keep it up, Dear ..

Shilpa 25 April 2010 at 18:27  

LOL .... very funny :)

Prasant Naidu. 25 April 2010 at 22:37  

sirji mazza agaya :)
tall,dark and handsome :P not me also and agreed sahid and hrithik have increased the bar., i love ur ending too...good stuff :D

Sandhya 26 April 2010 at 00:06  

Bhai Waah!!
Thanks for the laughs!

tarav amit 26 April 2010 at 09:48  

ये कहावत नहीं सुनी थी क्या ..
पढोगे लिखोगे होगे ख़राब
खेलोगे कूदोगे बनोगे नवाब !!
-अच्छी रचना !

Ashish (Ashu) 27 April 2010 at 16:24  

भाई, पहल एये बतावो कि भाई ऎसा सॊभाग्य मेरा तो नही हे...हम तो परेशान हो गये हॆ कि क्या बताये कोई झकास जुगाड हो तोइ बतावा भॆया..आप तो हमारे गुरो बन गये हो कि २५ साल तक भि कुवारे कि जमात मे शामिल हो, अरे अपने अटल बिहारी, बाजपेयी. ऎ.पी .जे कलाम ..सबकी जाने दो तो भी स्ल्लू मिया को हि देखो अभी तक कुवारो कि इजज्त बचाये हुये हॆ..परे शान मत होइये..मुझे भी कोई जुगाड बताइये

hello...guys 27 April 2010 at 21:14  

boss you bowled me over..this was incredibly good..after long time read something this good in hindi..i am glad to know that there is still hopes for my mother tongue..you rock!!

pukhraaj 29 April 2010 at 07:43  

ha ..ha,..ha.... good ...

Vivek Rastogi 9 May 2010 at 11:54  

ऐसे ही गणित हम भी देखते रहते हैं अपनी जिंदगी में, क्या क्या बदल गया है, पर दद्दू जमाना राकेट से भी तेज है भौत ही तेज, तेजी से बदल रहा है।

badree 20 May 2010 at 17:41  

ye ek bahut hi achhi website hai jiske madham se log ek dusre ke bhasha se interact ho sakte hai,

badree 20 May 2010 at 17:43  

ek achambha dekha re bhai kuaan me aagi lag, pani pathra sab jariga par machhari ke aanch na laag,

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