मोहब्बत के चक्कर-2

>> 01 July 2015

हाँ तो हम कहाँ थे. अरे हाँ तो बताया जा रहा था कि बिट्टू लड़की के न पहचाने जाने के कारण कि वो ही उनके बीते हर जनम के और आने वाले हर जनम के चाहने वाले हैं, घोर निराशा से घिरे हुए हैं. ऐसे जैसे किसी सरकारी स्कूल के मास्टर को स्कूल के लौंडों ने बाहर घेर लिया हो और पूछ रहे हों कि क्यों मास्साब तबियत पानी तो हरी भरी है कि हम  काट छाँट दे जो इधर उधर हाथ पैर निकल रहे हैं. माने कि बता रहे हैं कि एकदम एक्सपर्ट हैं अगर गाड़ी पटरी से उतर गयी है तो उसे चढाने में.

लेकिन वो मास्टर भी क्या मास्टर जो ऐसी मुसीबतों से घबरा जाए सो बिट्टू भी इस घोर निराशा को कह रहे हैं खरी खरी कि देखो जी बिट्टू किसी मजनू किसी छटी औलाद की औलाद न हुआ तो क्या हुआ. वो एक नया इतिहास बना अपना नाम मजनू को पीछे छोड़ इश्क़ की विकिपीडिया में डलवा के ही रहेगा.

छिछोरा, लुच्चा, लफंगा, आवारा जैसे नाम तो उसमें पहले से हैं लेकिन वो लड़की से एक नया नाम लेकर ही दम लेंगे जो इन सभी नामों की नाक काट दे और कहे कि देखो तुम भी कोई नाम हो. अरे नाम तो हम हैं जो बिटटू ने कमाया है और देखो हम इश्क़ की विकिपीडिया की टॉप सर्चिंग लिस्ट के टॉप पर विराजमान हैं.

बिट्टू मन ही मन अपने तन का ख्याल छोड़ ये कसम खाते हैं कि उस लड़की उर्फ़ अपनी महबूबा कम भविष्य के लिए सोची अपनी माँ की बहू को पटा कर ही दम निकालेंगे या लेंगे. आप इसमें से कुछ भी एक सोच सकते हैं. बिट्टू की इससे घंटा फर्क नहीं पड़ता. आजकल बिट्टू वैसे भी फर्क पड़ने वाली बातों से इतने दूर चले गए हैं कि उनको कोई होशो हवाश नहीं कि पढाई नाम की भी कोई चिड़िया होती है जो उनके दिमाग के आँगन से कब की उड़ चुकी है.

ऐसी दशाओं में आपको पहले से ही आगाह कर देते हैं कि लड़कियों के भाई कहानी में किसी भी वक़्त कहीं से भी कूद पड़ते हैं. वे किसी भी मजनू की छटी सातवीं आठवीं जो भी और जैसी भी औलाद हो की ऐसी की तैसी करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं. भले ही वो स्वंय किसी के लिए ऐसी हज़ारों और लाखों कसमें खा चुके हों.

पॉइंट पर अगर वापस आया जाये तो सीन कुछ ऐसा बनता है कि बिट्टू घोर निराशा से बहार निकल और साइकिल निकाल गली गली और सड़क सड़क बे मतलब और मतलब के मिले जुले जैसे कुछ इरादों सहित आवारा शब्द को चरितार्थ करते नज़र आ रहे हैं.

लड़की कोचिंग सेंटर के अंदर अंग्रेजी भाषा के अस्त्र शस्त्र चलने में पारंगत होने के दृण निश्चय के साथ बैठी है. और बिट्टू इसके बाहर निकल आ अपनी मोहब्बत की दुनिया अपने कंधे पे ढोते हुए खड़े नज़र आ रहे हैं. हर क्षण हर घडी उन्हें भारी पड़ता दिखाई दे रहा है और सोच रहे हैं कि इस अंग्रेजी की तो खैर हम बाद में जो करेंगे करते रहेंगे पहले वो बाहर आये और ये अपने नैनों के बीते दिनों में तोड़ दिए गए वाण फिर से जोड़ ऐसे चलाये की सीधा उनके दिल के पार हो जाये. जैसे उनका दोस्त रजिस्टर के आखिरी पन्ने पर बनाता है.

तो बिट्टू इंतज़ार में है.

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