प्रेम में होना

>> 09 July 2015

सबसे मुश्किल है प्रेम में होकर प्रेम गीत लिखना या लिखना कोई एक प्रेम कहानी. प्रेम में होना बना देता है साधारण सी प्रतीत होने वाली भावनाओं को दुरूह. प्रेम फिर केवल प्रेम भर नहीं रह जाता.
वो हो जाता है हिमालय की चोटी पर पहुंचे उस नई नई उम्मीदों से भरे पर्वतारोही सा. वो दिखता है, सुनाई पड़ता है लेकिन फिर भी अंत में आकर महसूसना भर रह जाता है.
बावजूद इसके कि करते हैं आप लाख प्रयत्न प्रेम नहीं सिमट कर आता किसी प्रेम कविता में.
प्रेम जतलाया जाना भी हो जाता है धीरे धीरे स्वंय जैसा. और आप रीते खड़े असहाय से बोल देते हैं पहले से बोलते आ रहे शब्दों को.
प्रेम बेजुबान एक स्वाद है. प्रेम बिना आवाज़ों का कोई संगीत जो बजता है भीतर ही भीतर और आप महसूसते हो उसे हर इक नए क्षण.
प्रेम केवल होना ही भर नहीं है.

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