एक हसीन ख्वाब

>> 30 July 2009

बादल का एक टुकडा आकर के बोला
देख चाँद लेकर आया हूँ तेरे लिए

मैंने देखा उसे करीब से
और आँखों में सजा लिया

एक हसीन ख्वाब सजा कर के आँखों में
वो मतवाला हो गया उड़न छू

अभी रहने दो मुझे नीद में
देखने दो मुझे ख्वाब

फिर क्या पता
नींद आये ना आये

23 comments:

Manorma 30 July 2009 at 12:52  

Bada pyar aa raha hai badal par...aakhir mazara kya hai :)

sudhir 30 July 2009 at 12:54  

very romantic poem bhai...

waise khwab mein kise dekh rahe hain aap

Bhavya.B 30 July 2009 at 13:46  

"Dekh chand lekar aaya hoon tere liye "...wow , what a romantic line !!!

Nirmla Kapila 30 July 2009 at 14:13  

बहुत सुन्दर कविता इस प्यार भरी अभिव्यक्ति के लिये बधाई

अनिल कान्त : 30 July 2009 at 14:18  

Thanks Aunty Ji, Bhavya, Manorama and Sudhir....Thansk a lot

ओम आर्य 30 July 2009 at 14:47  

kya baat hai anil bhai ......antim ki panktiyan to kamaal ki hai .....jo sidhe dil me uatar gaee

M VERMA 30 July 2009 at 15:54  

सुन्दर अभिव्यक्ति

पी.सी.गोदियाल 30 July 2009 at 15:58  

बढिया अनिल कान्तजी,
सूक्ष्म कर दिया, थोडा और खींच लेते तो और भी बढ़िया लगती !

सुशील कुमार छौक्कर 30 July 2009 at 16:36  

प्यारी सी बात कह दी।

अभी रहने दो मुझे नींद में
देखने दो मुझे ख्वाब
फिर क्या पता
नींद आये ना आये।

अति सुन्दर।

Mithilesh dubey 30 July 2009 at 18:20  

अभी रहने दो मुझे नीद में
देखने दो मुझे ख्वाब

फिर क्या पता
नींद आये ना आये


क्या बात है अनिल जी, सुन्दर रचना।।

vandana 30 July 2009 at 19:10  

itna haseen khwab dekhenge to kaun jagna chahega..........waah!bahut khoobsoorat.

raj 30 July 2009 at 19:26  

अभी रहने दो मुझे नीद में
देखने दो मुझे ख्वाब

फिर क्या पता
नींद आये ना आये ...apki kavita bhi khoobsurat kwab ki tarah hai...

महफूज़ अली 30 July 2009 at 22:42  

bahut hi khoobsoorat kavita.........badhai sweekar karen..........

मोहिन्दर कुमार 31 July 2009 at 10:45  

भाव भरी रचना..

मगर

ख्वाब तो ख्वाब है
आंखों में सजाया न करो
टूटे जो पल भर मे
उससे दिल लगाया न करो

Priya 31 July 2009 at 13:18  

aap to kahaniya likhte hain....ye kavita ka rukh kaise..... but achcha likha hai ......keep writing

कुश 31 July 2009 at 13:39  

मूड में लिखा .. लगता है..

अनिल कान्त : 31 July 2009 at 13:45  

अजी हम कहाँ लिखते हैं प्रिया जी कुछ ...
जो दिल कहता है वही लिख जाता है ...

वैसे जल्द ही कहानी भी लिखूंगा...

cmpershad 31 July 2009 at 15:44  

जागते रहो, जागते रहो............स्वप्न तो कभी सच नहीं होते...जागते रहो........:)

दिगम्बर नासवा 31 July 2009 at 18:10  

वाह अनिल जी बहूत ही खूसूरत ख्वाब है ये.......... काश कोई नींद से न जगाये

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) 1 August 2009 at 18:00  

bahut sundar kavita mitr vhavo ki itni sundar avhivyakti man mugd ho gaya merai badhayi swikaar kare
saadar
praveen pathik
9971969084

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