खुश होता हूँ ये देख कि एक्सपायरी डेट अभी बाकी है

>> 03 February 2009

जब आँखें थक जायें तो आँखों को बंद कर लेना चाहिए ....क्या पता बंद आँखों से कोई हसीन ख्वाब दिख जाये और मन को सुखद अनुभूति हो ...
इसी सुखद अनुभूति के साथ मैंने अपनी आँखें बंद की ....पता है मुझे तुम दिखायी दीं .... कहीं ऐसा तो नही कि तुम्हे देखने से ज्यादा सुखद कुछ लगता ही ना हो ......

हाँ पता है तुम अब यही कहोगी ...क्या तुमने अभी तक बाइक चलाना नही सीखी ....तुम्हारा कुछ नही हो सकता ...कैसे लड़के हो ....पर क्या करूँ तुम्हारी स्कूटी के पीछे की सीट मुझे अब भी बाइक चलाना सीखने से ज्यादा सुखद लगती है .....

अच्छा लो मैं हार गया ...तुम जीती ...हाँ मैं सीखने की कोशिश करूँगा .....अच्छा अब तुम मुस्कुरा क्यों रही हो ....अच्छा अब तुम यही कहना चाहती हो कि मैं हमेशा हार मान लेता हूँ .... हाँ हाँ पिछली गोल गप्पा कॉम्पटीशन तुमने ही जीती थी .....

पर अब गोल गप्पे देखता हूँ तो भी उन्हें खाने का मन नही करता ....तुम अब पास खड़े होकर कॉम्पटीशन नही करती .....सच कहूँ तुमसे हारकर ही मुझे खुशी मिलती है ....

पता है अब यही कहोगी बातें बनाना तो कोई तुमसे सीखे ....पर अब मैंने कई दिनों से मोबाइल भी रीचार्ज नही कराया ..... वो तुम्हारे रीचार्ज कराये हुए ४२ रुपये अभी तक वैसे ही पड़े हैं ......

तुम्हारा खरीदा हुआ मैगी का पैकेट अभी भी रसोई में रखा हुआ है ....रोज़ मेरी आँखों के सामने आता है ....चिढाता है ....और मैं खुश होता हूँ ये देख कि एक्सपायरी डेट अभी बाकी है ....

सुनिए एक बहुत ही खूबसूरत गीत ..... जिसके बोल हैं ...
सबसे पीछे हम खड़े ( सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें )

12 comments:

sunil 3 February 2009 at 22:09  

आप अपने मन की प्यार भरी अभिव्यक्ति कलम से जिस तरह करते हैं वो काबिले तारीफ़ है .....आपका ये प्यार भरा लेख पढ़कर सचमुच बहुत सुखद अनुभूति हुई .......

Manorma 3 February 2009 at 22:40  

आपकी इस प्यार भरी अभिव्यक्ति की जितनी भी तारीफ़ की जाए वो कम है .....सचमुच आप शब्दों में जादू भर देते हैं ..... आपकी एक एक लाइन पढ़ते हुए मुझे बहुत सुखद अनुभव हुआ ...सचमुच बहुत प्यारा है

रश्मि प्रभा 3 February 2009 at 22:40  

वाह......ये तो खूबसूरत एहसास हैं

संगीता पुरी 4 February 2009 at 00:08  

बहुत अच्‍छा लिखा है.....सचमुच बहुत प्‍यारा।

अनिल कान्त : 4 February 2009 at 15:34  

आप सभी का टिप्पणी के लिए शुक्रिया ......

bhawna 4 February 2009 at 19:36  

MITHI YAADON KI KOI EXPAIRY DATE NAHIN HOTI.BAHUT ACHHA LIKHTE HAIN AAP. LIKHTE RAHIYE .

the pink orchid 4 February 2009 at 21:56  

aapki bhaavnaao par koi expiry date nahin hai.. is baat ki khushi manaiye..

kabhi fursat mein idhur aaiyie
http://merastitva.blogspot.com

the pink orchid 4 February 2009 at 22:18  

blog follow kijiye.. taaki aapse lagaataar kuchh seekhti rahoon..

http://merastitva.blogspot.com

मुंहफट 5 February 2009 at 08:41  

यह वेब साइट भी आपकी
www.jaagtashahar.com

विनय 5 February 2009 at 14:08  

क़ाबिके-तारीफ़ लिखा है!

Pramod 5 May 2009 at 11:44  

आपके सारे लेखो कहानियों को मैंने पढ़ा, आपकी अभिव्यक्ति को पढ़कर ऐसै लगता है कि वह मैं ही हूँ। वाह ! वाह ! लाज़बाब ।

Priyanka Agrawalla 7 June 2009 at 07:54  

आपने बहुत ही सुन्दर और प्यार भरे लफ्जों में लिखा है. बहुत अच्छा प्रदर्शाया है. अच्छा लगा.

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