ई ससुर झूठ के भी पर होते हैं

>> 07 March 2009

बचपन से ही हम समझते कि हम बहुत होशियार हैं बिलकुल बीरबल की माफिक ... और बीरबल के उलट खुद को फसा देख जब तब झूठ बोल देते ...पर हद तो तब होती जब वो झूठ ना जाने क्यों उड़ कर सारे जहां में पंख पसार लेता ....और उस झूठ के पर कोई ना कोई देख ही लेता ...या वो झूठ खुद सिंगर बन कर गाता हुआ सबके सामने आ जाता ..... सचमुच तब यही दिल में आता ....कि ई ससुर के नाती "झूठ के भी पर होते हैं "

मुलायजा फरमाइए

जब भी बचपन में पेट दर्द का बहाना कर स्कूल ना जाने की इच्छा होती ...तो हम पेट समेत ही धर लिए जाते ....
अब हम तो पेट दर्द का बहाना कर दिए ...और पड़ोस के चिंकू ने जाकर क्लास में बता भी दिया कि मैडम आज वो नहीं आएगा ...उसके पेट में दर्द है ...और जब बाद में शाम को एक जानने वाले के यहाँ खीर पूडी की दावत उडाने पहुंचे ...तो पता चला कि हम बैठे चिल्ला रहे हैं कि एक पूडी और दो ....और पूडी देने वाले हमारी मैडम निकलती हैं ...."ई ससुरो झूठ हमाऊ ही चों पकडो जातु है "....तब एक ही ख्याल आत कि झूठ के भी पर होते हैं

थोड़े बड़े हुए १० वीं में आये नहीं कि प्यार का बुखार चढ़ गया ....ना जाने क्या मन में आया ...प्रेम पत्र लिख डाले ...१० कंचे का लालच देकर हमने प्रेम पत्र पहुँचने का जिम्मा जिसे दिया ... ऊ ससुर डाकिया गलत हांथों में चिट्ठी पहुंचा आया .... अब हमरी तो कर दी न दुर्दशा ....अब हमरी तो आ गयी ना शामत ......उसकी बड़ी बहन के आने पर जब झूठ बोला तो वहाँ भी पकड़ लिया गया ....ऊ ससुर कंचे खेलता हुआ ..हारकर वहीँ आ पहुंचा ...सबकी सब राजे वफ़ा धरी की धरी रह गयी ...अक्ल आई कि चाहे कुछ हो जाए ई ससुर प्रेम पत्र नहीं लिखेंगे ...

फिर पहली महबूबा ...पहला प्रेम....और पहली प्यार की पहली कॉल ...पर ई का ससुर बहुत नाइंसाफी ....उसके यहाँ तो कॉलर-आईडी लगी है रे ...हमारा नंबर धर लिया गया ....ऊ तो हम ही जानत हैं कि ऊ मुसीबत से कैसे पीछा छुडाये ....

और जब किसी शादी में पहुँच अपने से बड़ी लड़की को इम्प्रेस करन वास्ते खुद को ग्रेजुएट बताये तो पड़ोस के अंकल आकर पुँछ देते हैं ....कि बेटा तुम्हारे बोर्ड के इम्तिहान कब से हैं ....डेट आयी कि नहीं ..... अब हो गयी ना किरकिरी ....अगली तो बच्चा समझ बात भी न करे .....

और बड़े हुए ....पहला कॉलेज बंक ...पहला चोरी छुपे दोस्तों के साथ देखा मैटिनी शो ....और अगली सुबह हमारी सिनेमा की टिकट ...हमारी कपडों की धुलाई के साथ पकड़ ली जाती है .....अब हो गया ना सब चौपट .....आने दो पिताजी को :) :) ....कपडों के साथ हमरी भी दुलाई के पूरे चांस .....

तब समझ आया कि ई ससुर हमरे झूठ के बहुत पर निकल आते हैं ....और कोई ना कोई ...कहीं न कहीं ....वो झूठ के पर सारे के सारे गिन लेता है .....और सबके सामने बताने आ जाता है .....
जब जब होशियारी दिखाई धर लिए गए ...तब समझ आया कि बीरबल क्या चीज़ थे ....

" ई ससुर झूठ के भी पर होते हैं " ...................

19 comments:

paricharcha 8 March 2009 at 05:23  

झूठ के पर तो अवश्य होते हैं, तभी तो उड़ते हुए आपके ब्लॉग पर आ पहुंचे.

जरा अपने पिटने के वृतांत सुनाते ;)

दिगम्बर नासवा 8 March 2009 at 08:52  

Anil ji
aapne theek kaha, jhooth pakdaa jata hai kyuni uske pair nahi hote. Achaa likha, aaapka andaaz khoobsoorat hai apni baat rakhne ka

रंजन 8 March 2009 at 09:40  

अच्छा ्हुआ आपने देख लिये..

Mrs. Asha Joglekar 8 March 2009 at 10:40  

आपके झूट का किस्सा अचछा लगा । कहीं यह भी तो.................

सुशील कुमार छौक्कर 8 March 2009 at 11:21  

आपके किस्से नमकीन से लगे।

Anil Pusadkar 8 March 2009 at 11:29  

आज ही हमने भी माना है कि हम झूठ बहुत बोलने लगे हैं।मज़ा आ गया अपने एक हमनाम को हमकाम(प्रयोग कर रहा हूं)करते देख्। होली है।

neeshoo 8 March 2009 at 15:44  

बढ़िया है अनिल भई , ई तो लिखा बहुतय अच्छा लगा हमका तो'

Manorma 8 March 2009 at 18:22  

bhaai waah ye graduate waala maamla bahut achchha laga

रश्मि प्रभा 8 March 2009 at 19:37  

jhooth ke pankh mazedaar lage......

इष्ट देव सांकृत्यायन 8 March 2009 at 19:42  

अकिल के कच्चे नेता लोगन के ना देखत रहे? अरे एक बार पकड़ लिए गए त ओहमे शर्मान क कौन बात रहे?

Dileepraaj Nagpal 8 March 2009 at 21:48  

Haa haaa haa haa Hansa Hi Diya aapne. Jhooth ke par hote hain janab per unki udaan jyada lambi nahi hoti.
Mere Blog Per Tippani K Liye Shukriya Per

सब सुझाव दे रहे हैं कि उन साहब से पूछा जाये कि उनके घर में कितनी वेश्याएं है...देखिये सब ऐसा ही क्यूँ सोचते हो...उनके घर की महिलाओं की इसमें कोई गलती नहीं, फिर भी उन पर आरोप...क्यूँ? अगर ऐसा करें भी तो उनमे और हममे क्या फर्क रह जायेगा...

Tarun 9 March 2009 at 07:19  

ये सब पढ़कर तो हमें भी लगने लगा है झूठ के भी पर होते हैं

Dr.Bhawna 10 March 2009 at 14:10  

कमाल का लिखा है आपने...आप सबको होली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ...

अविनाश 10 March 2009 at 15:22  

आपके और आपके पुरे परिवार को होली की बधाई और शुभकामनायें.

धन्यवाद

neelima sukhija arora 12 March 2009 at 15:32  

maan gaye jhooth le bhi par hote hain. badhia likha aapne. holi ki bahut shubhkamnayen.

अनिल कान्त : 14 March 2009 at 09:46  

आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया

Dr. Chandra Kumar Jain 14 March 2009 at 09:53  

अच्छा लिख रहे हैं.
खूब पढें...खूब न सही
कम मगर सधा हुआ लिखें.
=======================
सस्नेह
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

PCG 16 March 2009 at 09:59  

सर्वप्रथम मेरे उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद अनिल कान्त जी !और आपको बताऊ कि आजकल झूट ने भी काफी टेक्नोलॉजी हासिल कर ली है और अब उसके पास न सिर्फ पर है अपितु एक उड़ने वाली मशीन भी है !

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