और इस तरह उनकी प्रेम कहानी शुरू हुई (भाग-2)

>> 19 March 2009

बस की मुलाक़ात के बाद सिद्धांत और रागिनी की मुलाक़ात एक बार फिर होती है ....आखिर जब प्यार होना होता है तो दो इंसान बार बार टकरा ही जाते हैं (शुरू की प्रेम कहानी पढने के लिए भाग -१ पढ़े)

दो दिन बाद सिद्धांत एक इंस्टिट्यूट पर पूँछताछ कर रहा था । तभी पीछे से एक जानी पहचानी आवाज़ सुनाई देती है । सिद्धांत पीछे मुड़कर देखता है । पीछे खड़ी रागिनी अपनी सहेली के साथ बातें कर रही थी ।

रागिनी सिद्धांत को देखकर कहती है ।
अरे आप यहाँ कैसे ?
कुछ ख़ास नही बस कोर्सेस की जानकारी लेने आया था । सिद्धांत ने कहा
तो ले ली जानकारी । रागिनी बोली
सिद्धांत : हाँ
यहाँ के बाद मैं आपके घर ही जाने वाला था । अच्छा हुआ आप यहीं मिल गई । ये लीजिये अपने किराये के पैसे । रागिनी को अलविदा कहने के बाद सिद्धांत वहां से घर की तरफ़ चल देता है ।

करीब पन्द्रह दिन बाद उसी इंस्टिट्यूट मैं सिद्धांत क्लास करने जाता है । वहां उसी क्लास मैं रागिनी भी बैठी दिखाई देती है । क्लास के बाद कंप्यूटर लैब थी । सिद्धांत लैब में जाकर कंप्यूटर पर काम करने लगता है ।
रागिनी लैब में आती है और सिद्धांत के ही पास के कंप्यूटर पर काम करने लगती है ।

हाय रागिनी कैसी हो ? सिद्धांत ने पूँछा
बिल्कुल ठीक । तो आपने प्रवेश ले ही लिया । रागिनी ने कहा
हाँ जी ले ही लिया । सिद्धांत बोला
लगता है आप कुछ पहले से आ रही हैं । सिद्धांत ने कहा
नही अभी पिछले सप्ताह ही प्रवेश लिया है । रागिनी बोली
वैसे तो ज्यादा नही जानती लेकिन फिर भी अगर आपको कोई परेशानी आए तो पूँछने में संकोच मत करना । रागिनी ने कहा
जी शुक्रिया । सिद्धांत बोला

कुछ ही दिनों में सिद्धांत के साथ सब घुल मिल जाते हैं । आख़िर ऐसा होता क्यों न सिद्धांत की बातें किसी मिश्री से कम न थी । रागिनी भी इन से अछूती न थी बल्कि रागिनी को सिद्धांत की बातें, उसकी निश्छलता सिद्धांत की तरफ़ खींचती ही चली जा रही थी । इस बात से क्लास का कोई भी साथी अनजान ना था । सिवाय ख़ुद रागिनी के ।

सिद्धांत की अन सब बातों और स्वभाव के साथ-साथ और भी बहुत कुछ था जो मशहूर था । और वो ये कि किसी भी क्लास में बोला हुआ एक शब्द न लिखना, समय पर कोई काम पूरा न करना , ना ही कोई प्रोजेक्ट रिपोर्ट या फाइल तैयार करना । इन सब के बावजूद जो एक अहम बात जो मायने रखती थी वो थी उसकी प्रोग्रामिंग दक्षता । क्लास में कोई उतना कुशल था तो वो थी रागिनी । रागिनी ही थी जो पढ़ाई में हर मामले में कुशल थी ।

रागिनी का स्वभाव हमेशा आगे रहने का और जीतने का था । उसको पीछे छोड़ना किसी के लिए आसान न था । सिद्धांत का स्वभाव था दोस्तानासब से बातें करना और सबकी बातें सुनना ये दो काम उसे बखूबी आते थे । शायद ये उसके स्वभाव में मिले हुए थे ।

अब अच्छी बातें किसी पसंद नही होती । अच्छी बातें करने वाले और अच्छा समय गुजारने वालों के सभी कायल होते हैं । अच्छा समय गुजारने वाले सिद्धांत की तरफ़ खिची जा रही रागिनी अकेली लड़की ना थी ।

वैसे किसी पुरूष को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए स्त्री का सुंदर और आकर्षक होना एकमात्र आसान वजह हो सकती है । परन्तु एक नवयुवक का सबसे बड़ा शस्त्र होती हैं उसकी बातें । अगर वो एक अक्छा वक्ता और समय गुजारने वाला व्यक्ति है तो समझ लो आधी ज़ंग तो उसने जीत ली । सिद्धात के साथ भी यही हुआ ।

सिद्धांत पच्चीस वर्षीय, पाँच फुट नौ इंच लंबा और स्वस्थ शरीर का स्वामी था । दिखने में ऐसा कि उसे नापसंद करने का कारण नज़र नही आता था । दूसरी ओर रागिनी बीस वर्षीय, पाँच फुट तीन इंच लम्बी साधारण नैन नक्श वाली एक कुशाग्र बुद्धि की लड़की थी । दूसरे शब्दों में कहें तो ऐसी लड़की जिसकी तरफ़ भले ही कोई आकर्षित न हो किंतु उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व में कुछ ख़ास था । रागिनी एक प्रभावशाली व्यक्तित्व की स्वामिनी थी ।

सच ही कहते हैं कि जब कोई किसी को चाहता है तो उसे अपना बनाने के लिए और उसे पाने के लिए हर सम्भव प्रयत्न करता है । रागिनी के साथ यह बात कुछ ज्यादा ही जुड़ी हुई थी । शायद स्त्री के स्वभाव में ये बात ज्यादा होती हो ।

एक बात जिससे हम भली भाँती परिचित हैं और वो यह कि कोई लड़की किसी को कितना भी चाहे साधारणतः वो ख़ुद अपनी तरफ़ से इस बात को स्वीकार नही करती । न ही ख़ुद अपनी ओर से पहल करती बल्कि वो हर दम यही कोशिश करती रहती है कि मेरी इस चाहत का किसी को ज़रा सा शक भी न हो सिवाय उसके जिसे वो चाहती है । ये सब रागिनी के साथ भी जुडा हुआ था ।

दूसरी तरफ़ सिद्धांत के साथ ऐसा बहुत कुछ जुडा हुआ था जो उसे क्लास के अन्य साथियों से अलग करता था ।
इस उम्र में जब सिद्धांत अपने जीवन को सुधारने के लिए संघर्षशील था । वहीँ उसकी उम्र के अन्य मित्रगण अपना मुकाम पा चुके थे । कोई इंजिनियर, कोई डॉक्टर और कोई सरकारी दामाद बना हुआ था ।

ऐसे में किसी को चाहने का सिद्धांत के मन में ख्याल तक नही आ सकता था । वहीँ रागिनी अभी बीस वां बसंत देख रही थी । उसके लिए सिद्धान्त को चाहने लगना एक साधारण बात थी ।
ऐसा नही था कि सिद्धान्त को रागिनी के प्यार की ख़बर न थी । आख़िर रागिनी के प्यार की ख़बर तो सिद्धांत को पता होनी थी ।

इंसान की चाहत कभी उसकी आंखों में तो कभी उसकी कोशिश में नज़र आ ही जाती है । रागिनी के साथ भी यही सब जुडा हुआ था । उसकी कई बार की कोशिश से सब को पता चल गया कि रागिनी के दिल में क्या है ।
क्लास के साथ के दोस्त institute की तरफ़ से घूमने के लिए आगरा जा रहे थे । institute ने इसके लिए प्रति व्यक्ति ढाई सौ रुपये किराये के तौर पर लेने के लिए नोटिस लगा दिया । जो भी छात्र या छात्रा जाने का इक्छुक है वो एक सप्ताह के अन्दर रुपये जमा करा दे ।

क्लास में सभी बैठे हुए थे तभी क्लास के साथी विवेक ने कहा कि वाह हम सब आगरा घूमने जा रहे हैं कितना आनंद आएगा । जब हम सब बस में एक साथ बैठकर जायेंगे और ताजमहल, लाल किला , फतेहपुर सीकरी देखेंगे । जब सिद्धांत हमारे साथ होगा तो वक्त का पता ही नही चलेगा ।

सिद्धांत तुम चल रहे हो न हमारे साथ । विवेक ने कहा
नही दोस्त मेरे लिए जाना मुमकिन नही होगा । सिद्धांत बोला
यार ये तो कोई बात नही हुयी । साथ ही बैठी क्लास की साथी प्रिया ने कहा
देखो दोस्तों मेरी ऐसी हालत में मेरे लिए एक पैसा फालतू घर वालों से माँगना बिल्कुल मुमकिन नही होगा । सिद्धांत बोला
रागिनी पास ही कि सब सुन रही थी। रागिनी तो चाहती थी जाये वो ताजमहल सिद्धांत के साथ ही जाये और देखे ।

ओह यार तूने तो हमारे अरमानो का गला घोंट दिया । विवेक ने कहा
कोई नही तुम सब तो साथ जा ही रहे हो । सिद्धांत ने कहा
यार तू मुझ से पैसे ले लेना और जमा कर देना । विवेक बोला
नही शुक्रिया दोस्त लेकिन में तुमसे पैसे नही ले सकता । क्योंकि में पैसे वापस नही कर सकता । सिद्धांत ने कहा

क़र्ज़ चाहे छोटा हो या बड़ा , दोस्त से लिया गया हो या किसी और से वो इंसान को झुका देता है । ये बात सिद्धांत अच्छी तरह जनता था । इंस्टिट्यूट का दिया हुआ समय ख़त्म हो चुका था । आज सुबह जब नोटिस बोर्ड पर विवेक जाने वालों की लिस्ट देख रहा था तभी उसका ध्यान सिद्धांत के नाम पर जाता है । पहले तो वो बहुत खुश हुआ लेकिन बाद में उसे थोड़ा अजीब भी लगा मना ये तो मना कर रहा था फ़िर इसने रुपये कैसे जमा करवाए ।विवेक सीधा कंप्यूटर लैब में गया ।

यार तुम तो कह रहे थे की तुम नही जाओगे और तुमने तो रुपये भी जमा करा दिये । विवेक सिद्धांत से बोला
सिद्धांत कंप्यूटर पर काम कर रहा था और उसके पास प्रिया और रागिनी बैठी हुई थी ।
रुपये कौन से रुपये ? मैंने कोई रुपये जमा नही करवाए । सिद्धांत बोला
कैसी बातें कर रहा है । तुमने रुपये जमा नही कराये तो क्या संता क्लोस आकर जमा कर गए क्या ? विवेक बोला
अब वो सब मुझे नही पता । सिद्धांत बोला

सभी हैरान कि अगर सिद्धांत ने पैसे जमा नही कराये तो किसने कराये ? लेकिन इस बात से रागिनी बिल्कुल भी हैरान नही थी । क्योंकि सिद्धांत के पैसे रागिनी ने ही जमा कराये थे । रागिनी जानती थी कि इस तरह तो सिद्धांत साथ चलेगा नही और न ही किसी से पैसे लेगा । इसी लिए सिद्धांत को साथ ले जाने के लिए रागिनी ने पैसे जमा करा दिये थे ।

अब जब मैंने पैसे जमा नही कराये तो में क्यूँ जाऊँ ? सिद्धांत बोला
अब ये क्या बात हुई ? विवेक ने कहा
अब जब पैसे जमा हो ही गए हैं तो जाने में क्या हर्ज़ है ? प्रिया बोली
हाँ और नही तो क्या । रागिनी बोली
अब तो चलना ही पड़ेगा । विवेक ने कहा
सिद्धांत : मगर
अगर मगर कुछ नही और सभी जिद करने लगे ।अच्छा चलो देखते हैं । सिद्धांत बोला

क्लास के बाद सिद्धांत इंस्टिट्यूट के बाहर खड़ा हुआ सिगरेट पी रहा था । रागिनी और प्रिया दोनों वहां से निकल रही थी । सिद्धांत को सिगरेट पीते देख ।


सिद्धांत तुम सिगरेट पीते हो ? रागिनी और प्रिया एक साथ बोली
क्यों पीते हुए देखने के बाद भी यकीन नही हो रहा क्या ? सिद्धांत बोला
ये तो ग़लत बात है । प्रिया ने कहा ....हाँ ये सही नही है । रागिनी बोली
अब ग़लत है या सही जो भी है । सच तो यही है कि मैं सिगरेट पीता हूँ । मैं आजकल का थोड़े पी रहा हूँ । मुझे तो चार-पाँच साल हो गए पीते हुए । सिद्धांत ने कहा
छोड़ दो ये आदत सही नही है और तुम तो अच्छे लड़के हो । प्रिया बोली
कमाल है तुमसे ये किसने कहा कि सिगरेट सिर्फ़ बुरे लोग पीते हैं । सिद्धांत मुस्कुराते हुए बोला
लेकिन छोड़ने की कोशिश तो कर ही सकते हो । रागिनी बोली
हम्म देखते हैं । सिद्धांत बोला

अगले दिन सभी आगरा गए । बस मैं सभी खुश थे और सब से ज्यादा खुश थी रागिनी । होती भी क्यूँ न आख़िर सिद्धांत जो साथ मैं चल रहा था । रागिनी की आँखों मैं सिद्धांत के लिए चाहत सबको साफ़ नज़र आने लगी थी । मगर सब कुछ जानते हुए भी सिद्धांत खामोश था ।

दिलचस्प इंसान मैं कोई भी दिलचस्पी ले सकता है । उस सफर मैं प्रिया कुछ ख़ास ही दिलचस्पी ले रही थी सिद्धांत मैं । जब किसी की चाहत और किसी के प्यार मैं कोई और भी दिलचस्पी लेने लगे तो किसी के लिए भी वह इर्ष्या का विषय बन सकता है । लेकिन इन सबके बावजूद रागिनी कुछ नही कहती थी । बस उसकी कोशिशे लगातार जारी थी ।

सभी लोग ताजमहल पहुंचे और रागिनी तो बहुत खुश थी । खुश हो भी क्यों ना अपने प्यार के साथ वो ताजमहल देख रही थी । सिद्धांत जो उसके साथ था । सभी लोगो ने ताजमहल , लाल किला और फतेहपुर सीकरी घूमे । सभी लोगों के फोटो भी लिए गए । सभी जगह घूमने के बाद बस आगरा से वापस आ गई और सभी ने बहुत आनंद लिया ।

8 comments:

mamta 19 March 2009 at 15:30  

interesting ।
कहानी अभी जारी है ना । :)

लवली कुमारी / Lovely kumari 19 March 2009 at 16:08  

हूँ...आगे का इन्तिज़ार है

दिगम्बर नासवा 19 March 2009 at 16:17  

anil जी
kahaani achhe चल रही है..........
बस आगे ऐसे ही badhaate jaayen

कुश 19 March 2009 at 17:08  

wakai bahut interesting hai..

रंजना [रंजू भाटिया] 19 March 2009 at 17:27  

आगे क्या हुआ ? रोचक है ..कहानी ...अभी कहानी जारी है ...:)

अनिल कान्त : 19 March 2009 at 17:40  

हाँ दोस्तों कहानी अभी जारी है ....... :) :)

Udan Tashtari 19 March 2009 at 20:48  

बहुत दिलचस्प-आगे इन्तजार है. रोचक बहाव!!

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